
अब ऐसे ही दोपहर होता है। अधीरा इतने समय तक कमरे में ही रही थी और आगे क्या करना है, उसके बारे में सोच रही थी। तभी बाहर से कोई नॉक करता है, तो वह जाकर दरवाज़ा खोल देती है। बाहर नंदिनी खड़ी थी। वह मुस्कुराकर अधीरा से कहती है, "जीजी, चलिए भोजन करते हैं। सभी नीचे इंतज़ार कर रहे हैं।"
अधीरा "ओके" कहती है और उसके साथ जाने लगती है। उसने अपने साथ अपना फोन भी ले लिया था। वह कुछ कॉल्स, जो इंपॉर्टेंट थीं, उन्हें भी अटेंड कर चुकी थी, पर वह नहीं जानती थी कि कब कौन कॉल कर दे। इसीलिए वह अपने साथ अपना फोन ले लिया था।



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