
अब तक आपने पढ़ा कि मन्नत वीर को अपने कमरे में लेकर आती है। फिर उसको राहती है कि उसके ऊपर सिर्फ उसका हक है और वह उसका बॉयफ्रेंड है। फिर उन दोनों के बीच एक पैशनेट किस होती है। फिर वीर डिसीजन लेता है कि वह मन्नत को एक अच्छी जिंदगी देगा और उसकी पूरी तरह से बदल देगा। फिर मन्नत रोमांस के बारे में जान जाती है।अब आगे।अब ब्रेकफास्ट टेबल पर पृथ्वी जी, मन्नत, आध्या, आन्या बैठकर अपना ब्रेकफास्ट कर रहे थे। ब्रेकफास्ट करते-करते पृथ्वी जी मन्नत की तरफ देखते हैं। फिर कहते हैं, "मन्नत, हमें आपसे कुछ बात करनी है।" तो मन्नत खाते हुए कहती है, "कहिए।" तो पृथ्वी जी कहते हैं, "प्रिंसेस, हम चाहते हैं कि आप जिस प्रोजेक्ट के बारे में सोच रहे हैं, उसको न करें।" तो मन्नत के हाथ खाते-खाते रुक जाते हैं। और वह पृथ्वी जी की तरफ देखती है। अब पृथ्वी जी फिर से कहते हैं, "आपके पापा ने इस प्रोजेक्ट की वजह से अपनी जान गंवा दी। और इस प्रोजेक्ट की वजह से आपने अपने मां-बाप के साथ-साथ अपना पूरा बचपन खो दिया। हम आपको अपने दोस्त और बहन की तरह नहीं खोना चाहते।" यह कहकर वह मन्नत की तरफ देखने लगे। वह इस बात को कहने के लिए बहुत हिम्मत जुटाई थी। वही मन्नत जो अपना खाना खा रही थी, उसके हाथ यह सुनकर रुक जाते हैं। और वह अपनी आंखें बंद कर लेती है। तो उसके सामने कुछ सीन रियल की तरह चलने लगते हैं। उन सबको याद करते ही उसका गुस्सा बढ़ने लगता है। और आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है। वह उठकर खड़ी होती है। और गुस्से से पृथ्वी जी की तरफ देखने लगती है। वही उसके लाल आंखें देखकर वह तीनों डर गए। अब मन्नत टेबल पर टेबल क्लॉथ को जोर से खींच लेती है। जिससे टेबल पर सारा सामान, सारा खाना सब कुछ नीचे गिर जाता है। वही उसकी इतनी सुदन एक्शन से वह तीनों डर कर खड़े हो जाते हैं। और डरते हुए मन्नत की तरफ देखने लगे। वही मेंशन के अंदर से आ रही तेज आवाज को सुनकर वीर, उसकी टीम और मन्नत के गार्ड अंदर आ जाते हैं। और डायनिंग एरिया की तरफ बढ़ जाते हैं। और वहां पहुंच जाते हैं। फिर वह लोग देखते हैं कि पृथ्वी जी, आध्या और अन्य डरते हुए मन्नत की तरफ देख रहे थे। वही मन्नत टेबल पर अपना दोनों हाथ का अपना सर नीचे किए हुए खड़ी थी। पर उसके अंदर से बहुत ही डार्क ऑरा निकल रहा था। वह बहुत तेजी से सांस ले रही थी। जैसे वह कुछ कंट्रोल करना चाहती हो। जिसे देखकर साफ समझ सकते हैं कि वह कितनी गुस्से में है। उसको और वहां के हालात को देखकर सब हैरान थे। काशकर वीर और उसके टीम मन्नत के गार्ड को तो कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था। क्योंकि उन लोगों को मन्नत के गुस्से की आदत थी। अब मन्नत टेबल पर जोर से अपना एक हाथ पटकती है। जिससे पूरे टेबल पर एक क्रैक आता है। और जोर से आवाज आती है। और साथ में मन्नत के हाथ से भी खून बहने लगता है। यह देखकर सब और डर जाते हैं। अब मन्नत पृथ्वी जी को अपनी लाल आंखों से घूरते हुए कहती है, "मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि मुझे इसके बारे में कुछ बात नहीं करना। और यह प्रोजेक्ट पूरी होकर ही रहेगा। चाहे इसमें मेरी जान ही क्यों न जाए। हां, इसने मेरी सब कुछ छीना। इसकी वजह से मैं टूट गई। पर मुझे इस प्रोजेक्ट को पूरा करना ही है। क्योंकि यह मेरे पापा का सपना है। मुझे इसे पूरा करने से कोई नहीं रोक सकता। कोई भी नहीं। आइंदा से इस बारे में मुझे कुछ बात कहा या मुझे रोकने की कोशिश की तो मैं सब कुछ तबाह कर दूंगी। याद रखना। अंडरस्टैंड!" यह उसने इतनी तेज आवाज में कहा कि पृथ्वी जी, आध्या और अन्य जल्दी से अपना सर हिला देते हैं। उनके पसीने छूट रहे थे। अब मन्नत खुद को कंट्रोल करने के लिए तेज-तेज सांस लेने लगी। पर उसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। वह समझ गई थी कि अगर अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं किया तो वह जरूर किसी को हर्ट कर देगी। पृथ्वी जी, आध्या और अन्य भी उसकी हालत समझ गए थे। पृथ्वी जी आगे जाने को होते हैं। पर मन्नत अपना हाथ दिखा देती है। पृथ्वी जी के आंखों में उसकी हालत देखकर आंसू आ गए थे। साथ में अन्य और आध्या के आंखों में भी। वही बाकी लोग यह सब नजारे हैरानी से देख रहे थे। वीर और उसकी टीम भी डर गई थी। अब मन्नत अपने आसपास देखती है। फिर नीचे गिरी हुई नाइफ को उठाकर अपने एक हाथ से उसे जोर से पकड़ लेती है। जिससे उसके हाथ से खून की धारा तेजी से बहने लगी। उसको जितना अपने दिल में दर्द महसूस हो रहा था, उसके आगे उसे हाथ के जख्म से दर्द तो बिल्कुल भी नहीं हो रहा था। अब पृथ्वी जी खुद को नहीं रोक पाए। और आगे आते हैं। और मन्नत के हाथ से उसे नाइफ को दूर करने लगते हैं। अब अन्य और आध्या भी आगे जाकर पृथ्वी जी की मदद करने लगे। उनके बहुत कोशिशों के बाद मन्नत ने वह नाइफ छोड़ दी। पृथ्वी जी रोते हुए कहते हैं, "पागल हो गए हो आप! खुद को क्यों हर्ट कर रहे हैं?" पर मन्नत कुछ नहीं कहती। उसके चेहरा फिर से इमोशनलेस हो गया है। उसके चेहरे पर दर्द की शिकन भी नहीं थी। अब पृथ्वी जी अन्य जी की तरफ देखकर कहते हैं, "अन्य, जल्दी से फर्स्ट एड लेकर आओ।" तो अन्य जो बाकी लोगों के पास खड़ी थी, वह जल्दी से हां कह कर फर्स्ट एड लेने चली जाती है। वही पृथ्वी जी मन्नत को लेकर हॉल में आ जाते हैं। मन्नत के हाथों से अभी भी खून बह रहा था। जिसे देखकर वीर की आंखों से भी आंसू आ गए थे। उसे मन्नत की हालत देखी नहीं जा रही थी। वीर की नजर सिर्फ मन्नत के उस जख्म पर थी। वही उसके पीछे उसकी टीम अभी भी मन्नत के गुस्से से डर रही थी। वही वैष्णव सब की तरफ देखकर कहता है, "अब हमें बाहर चलना चाहिए।" तो सब हां कहते हैं। शिवाय वीर के। अब सब बाहर जाने लगे। वीर को नोटिस न करते देख वैष्णव वीर की तरफ देखकर कहता है, "मिस्टर वीर!" तो वीर जल्दी से अपने आंसुओं को पोंछकर वैष्णव की तरफ देखकर कहता है, "तुम जाओ, मैं आता हूं।" तो वैष्णव वहां से बाकी लोगों के साथ चला जाता है। वही वीर दूर से यह सब कुछ देखने लगता है। उसकी नजर अभी भी मन्नत के जख्म पर थी। जो अब पृथ्वी जी क्लीन कर रहे थे। अन्य जी ने एक डॉक्टर को भी बुला लिया था। वह आते ही होंगे। पृथ्वी जी उस खून को रोकने की कोशिश कर रहे थे। मन्नत ने जोर से नाइफ को पकड़ने की वजह से जख्म थोड़ा गहरा हो गया था। मन्नत के चेहरे पर अभी भी कोई एक्सप्रेशन नहीं थे। उसका गुस्सा अब कंट्रोल हो गया था। वह बस बिना किसी इमोशन के अपने हाथ को देख रही थी। करीब 15 मिनट बाद वहां एक डॉक्टर आता है। जो पृथ्वी जी की उम्र का है। यह भी पृथ्वी जी और नील जी की तरह आर्यन जी के दोस्त थे। और यह बचपन से मन्नत को ट्रीट कर रहे थे। यह बहुत अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट हैं। वो जल्दी से मन्नत के पास आ जाता है। पृथ्वी जी उसकी तरफ देखकर कहते हैं, "श्याम जी, देखो प्रिंसेस के हाथ से कैसे खून निकल रहा है। इसको रोको प्लीज।" तो श्याम जी जल्दी से मन्नत के दूसरी तरफ बैठ जाते हैं। और अपनी मेडिकल किट से कॉटन और बाकी चीजें लेकर जल्दी से मन्नत के हाथों से बहती हुई खून को रोकने की कोशिश करने लगे। और थोड़ी मशक्कत करने के बाद मन्नत का खून रुक जाता है। वह ध्यान से उसके हाथ को ट्रीट करके पट्टी बांधते हैं। फिर पृथ्वी जी की तरफ देखकर कहते हैं, "यह सब कैसे हुआ? इसकी चोट से तो लग रहा है कि इसने जानबूझकर नाइफ को पकड़ा। जिससे इतना गहरा घाव हुआ।" तो पृथ्वी जी कहते हैं, "सब मेरी गलती है।" वही अब मन्नत वहां से उठ गई थी। और उन दोनों को इग्नोर करते हुए अपने कमरे की तरफ चली गई थी। उनके जाने के बाद पृथ्वी जी फिर से कहते हैं, "सब मेरी गलती है। मुझे उसे बात को छेड़ना ही नहीं था। मैं बस उसे प्रोजेक्ट की वजह से परेशान हूं। तुम जानते हो ना, उसे प्रोजेक्ट की वजह से हम सब ने क्या खोया है। मैंने अपना दोस्त जो मेरा भाई जैसा है और बहन जिसने मुझे राखी बांधी, उन दोनों को खो दिया। और मेरी प्यारी प्रिंसेस उसकी तो सब कुछ खत्म हो गया। उसने अपने मां-बाप के साथ-साथ अपनी पूरी बचपन खो दिया। और ऐसी बन गई। इसीलिए मैं कुछ दिनों से प्रोजेक्ट की वजह से परेशान हूं। अब यह प्रोजेक्ट उसकी जिद बन गई है। आज मुझे इस बात को छेड़ने की वजह से उसका गुस्सा फिर से आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। उसने बहुत गुस्सा किया। सारी चीजों की तोड़फोड़ की। फिर खुद को शांत करने की कोशिश में उसको लगा कि अगर वह शांत नहीं हुई तो हम में से किसी को हर्ट कर देगी। इसीलिए उसने खुद को हर्ट किया। और उसका नतीजा है वो हाथ।" यह कहकर वह निराश हो जाते हैं। वही उनकी बात सुनकर श्याम जी कहते हैं, "पृथ्वी जी, तुम जानते हो उसकी हालत कितनी नाजुक है। तुम्हारी चिंता भी मैं समझ सकता हूं। पर अभी तुम उसके सामने वह बात फिर से कही तो तुम्हें उसकी उकसाना जैसा ही होगा। वह एक साइकोपैथ है। पर हम सब ने मिलकर उसको गलत रास्ते पर नहीं जाने दिया। वह खुद की तलब को रोकती हैं ताकि लोगों को नुकसान न पहुंचे। इसीलिए वह खुद को हर्ट करती है। पर अगर उसका गुस्सा फिर से अनकंट्रोल हो गया और उसके दिमाग पर चढ़ गया तो अगली बार वह खुद को फिर से टॉर्चर करेगी। साथ में उसकी नर्वस सिस्टम पूरी तरह से डैमेज हो जाएगी। जिससे उसकी ब्रेन पैरालाइज हो जाएगी। आगे से सावधान रहना। उसकी हालत बहुत नाजुक है।" तो पृथ्वी जी अपना सिर हिला देते हैं। अब श्याम जी कहते हैं, "मैं चलता हूं। मेरे लिए एक पेशेंट वेट कर रहा है। मुझे अभी उनका ऑपरेशन करना है।" तो पृथ्वी जी कहते हैं, "हां।" फिर श्याम जी वहां से चले जाते हैं। उनके जाने के बाद आध्या पृथ्वी जी से कहती है, "अंकल प्लीज, आगे से यह बात मत बोलिए।" तो पृथ्वी जी हां कहते हैं। और वह भी उठकर अपने कमरे में चले जाते हैं। वही वीर जो यह सब देख रहा था और सुन रहा था, श्याम जी के बाहर जाते देखता है। वह उनके पीछे चला जाता है। अब श्याम जी बाहर आ गए थे। वीर उनको रोकते हुए कहता है, "सर, 1 मिनट।" तो श्याम जी रुक कर पीछे पलट कर देखते हैं। तो वहां वीर को देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं। और कहते हैं, "आप कौन हो? और यहां क्या कर रहे हैं?" तो वीर खुद की इंट्रोडक्शन देते हुए कहता है, "सर, मेरा नाम वीर ओबेरॉय है। मैं मन्नत की पर्सनल बॉडीगार्ड और स्पेशल टीम से आया हूं। जो मन्नत के ऊपर थ्रेट है, उसकी वजह से।" तो श्याम जी को याद आता है कि नील जी ने उनको यह बात बताई थी। तो वह कहते हैं, "हां, मुझे नील ने बताया। तुम्हें मुझसे क्या बात करना है?" तो वीर कहता है, "सर, मन्नत की इस बिहेवियर की वजह क्या उनके डिसऑर्डर है?" तो श्याम जी कहते हैं, "हां, उसकी डिसऑर्डर ही है। मैं बचपन से उसको ट्रीट कर रहा हूं। मैं उसकी हालत बहुत अच्छे से जानता हूं। वैसे तुम यह क्यों जानना चाहते हो?" तो वीर कहता है, "सर, मैं 24/7 उनके साथ ही रहता हूं। मुझे बस यह जानना है ताकि थोड़ी सतर्क रह सकूं। अगर मन्नत को फिर से पटक आया तो आपको या पृथ्वी सर को इन्फॉर्म कर सकूं।" तो श्याम जी कहते हैं, "अच्छी बात है। अगर उसे वह फिर से ऐसे अनकंट्रोल हो गए तो तुम तुरंत मुझे कॉल करके बुला लो। तुम्हें पृथ्वी जी मेरा नंबर दे देंगे। या फिर तुम अन्य या आध्या से भी पूछ सकते हो। अभी मुझे जाना है। एक जरूरी पेशेंट को देखना है।" तो वीर हां कहता है। फिर श्याम जी वहां से चले जाते हैं। उनके जाने के बाद वीर ऐसे ही 2 मिनट वहां रह कर कुछ सोचने लगता है। फिर तभी अयान उसको बुलाता है। तो वह उसकी तरफ चला जाता है।अयान वीर की तरफ देख कर कहता है, "वीर, यह सब क्या है? आज मुझे सच में भाई या दादाजी के अलावा किसी के गुस्से से इतना डर लगा। उसकी बिहेवियर कितनी अलग है। वह दिखती बिल्कुल शांत। पर आज बिल्कुल किसी डिक्टेटर की तरह लग रही है।" तो वीर कहता है, "प्लीज भाई, आप किसी को ऐसे जज नहीं कर सकते। मैं आपको बताया था ना कि उनको एंटी-सोशल डिसऑर्डर है। जो साइकोपैथ कहते हैं। कुछ गलत काम नहीं करती है। तभी हम समझ सकते हैं कि उनके बिहेवियर कैसा है। और अभी मैं अंदर सब बात सुनी है। मिस्टर पृथ्वी ने मेम से उनके पास्ट से जुड़ी कुछ बात बताई थी। शायद इसीलिए उनका गुस्सा और डिसऑर्डर दोनों ट्रिगर हुआ। पर इतना गुस्सा होने के बाद भी वह किसी को हर्ट नहीं की। खुद को हर्ट करना चुना। जिससे हम समझ सकते हैं कि वह भले दिखाई न हो, पर उनके दिल में सबके लिए कितनी फिक्र है।" तो उसके बाद अयान को भी रिलैक्स होता है। कि उसने मन्नत को जाने बिना जज कर लिया है। तो वह कहता है, "सॉरी वीर। उनके बिहेवियर देखकर मुझे ऐसा लगा था। पर तुम सही हो। हम किसी को देखकर उनके कैरेक्टर को जज नहीं कर सकते। वैसे तुम उसकी इतनी फिक्र क्यों कर रहे हो? और ऐसे डिफेंड क्यों कर रहे हो? मैं कल भी देखा था। तुम बहुत सीरियसली उसको डिफेंड कर रहे हो।" तो वीर उसे अपनी नजरें चुराने लगता है। तो अयान को कुछ शक होता है। वह वीर की तरफ देखकर पूछता है, "वीर, सही से बताओ। क्या कुछ बात है जो तुम मुझसे छुपा रहे हो? हमारे भाइयों के बीच कुछ भी नहीं छुपता। तुम यह बात खुद बता दो। ताकि हमें बाद में कहीं और से पता न चले।" तो वीर कहता है, "भाई, मैं मिस मल्होत्रा से प्यार करता हूं।" तो यह सुनकर अयान हैरानी से वीर की तरफ देखने लगा। उसका मुंह खुला का खुला रह गया। वह ठहरकर कहता है, "क्या?" तो वीर अपना सर हिला देता है। तो अयान कहता है, "यह कब हुआ? तुम तो उनसे कल ही मिले थे ना? तो एक दिन में प्यार कैसे हो सकता है?" तो वीर कहता है, "नहीं भाई, मैं उनसे कल नहीं पर पहले भी मिल चुका हूं। सिर्फ मैं ही नहीं, आप भी मिल चुके हैं।" तो अयान कंफ्यूज होता है। तो वीर कहता है, "आप पहले मुझे प्रॉमिस कीजिए कि आप यह बात किसी को भी नहीं बताएंगे। तभी मैं आपको बताऊंगा। मुझे आप पर बड़ा भरोसा है। पर हम जिस फील्ड में हैं, उसके हिसाब से यह जरूरी है।" तो अयान कुछ सोच कर उसको वादा कर देता है। तो वीर कहता है, "भाई, उस दिन हार्बर में हम सब क्वीन को देखा है ना? मिस मल्होत्रा ही क्वीन है।" तो अब यह बात अयान के ऊपर किसी पहाड़ से कम नहीं थी। जिसकी चर्चा पूरे शहर में छाई हुई थी। जिसकी कॉप सब के दिलों में है। गलत रास्ते पर चलने के बाद भी अच्छा काम करने वाले क्वीन कोई और नहीं, मन्नत है। यह जानकर वह सच में बहुत हैरान था। वह फ्रिज हो गया था। अयान को ऐसे फ्रिज होते देख वीर अयान के कंधे पर हाथ रखकर थोड़ा हिलाते हुए कहता है, "भाई!" तो अयान होश में आकर कहता है, "क्या? क्या मिस मल्होत्रा ही क्वीन..." उसने इतना ही कहा था। उससे पहले ही वीर ने उसके मुंह पर हाथ रख लिया था। जिससे उसकी बात अधूरी रह गई। अब अयान को भी अपनी गलती का अंदाजा होता है। तो वह अपना सर हिला देता है। तो वीर अपना हाथ हटा देता है। अब अयान बहुत धीरे से पूछता है, "क्या मिस मल्होत्रा ही क्वीन है?" तो वीर हां कहता है। अब अयान सीरियस होकर कहता है, "वीर, यह बहुत खतरनाक है। तुम बहुत खतरनाक इंसान से प्यार कर रहे हो। उनकी दुनिया और हमारी दुनिया बहुत अलग है। और तुम जानते हो ना हमारे परिवार को।" तो वीर कहता है, "जानता हूं भाई। पहले मैंने भी सोचा कि इस रास्ते पर कभी नहीं चलूंगा। पर जब मैंने मन्नत को हार्बर में देखा। पहली नजर में ही मैं उनसे प्यार कर बैठा। वह बहुत नादान है। भले ही वह इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा मुकाम हासिल किया। न जाने कितनी बुराइयों का खात्मा किया। पर वह जैसी दिखती है वैसा बिल्कुल भी नहीं है। मैंने नील सर और पृथ्वी सर से सुना कि उनका बचपन बहुत खराब है। उन्होंने छोटी उम्र में ही बहुत कुछ सहा है। वह बाहर से कितनी सख्त दिखती है। अंदर से उतनी ही नरम और मासूम। वह अपनी मासूमियत को खुद के अंदर छुपा लिया है। और उनके डिसऑर्डर एक अलग ही बात है। She doesn't even know adult things." तो अयान कंफ्यूज होकर उसकी तरफ देखता है। तो वीर कल मन्नत के साथ हुई बातें बता देता है। जिसे अयान फिर से हैरान होकर कहता है, "डी नंबर वन बिजनेस टाइकून का एशिया और अंडरवर्ल्ड वेपन क्वीन को एडल्ट थिंग्स के बारे में नहीं पता। सच्ची ब्रेकिंग न्यूज है। ठीक है, मुझे इस रिश्ते से कोई प्रॉब्लम नहीं है। वो बहुत छोटी है। पर बचपन से बहुत सहा है। जब तुम उसके दिल जीतोगे और पत्नी बनकर हमारे घर लाओगे। हम सब उसकी बहुत कायल होंगे।" तो वीर उसकी बात पर खुश होकर उसको गले लगा लेता है। उसकी खुशी देख कर अयान भी खुश था। अब वीर अयान से दूर होकर कहता है, "मुझे आपसे यही उम्मीद है भाई। थैंक यू।" तो अयान बस उसके सिर को सहला देता है। फिर वीर वहां से चला जाता है। उसके जाने के बाद अयान कहता है, "एक मिनट। अगर मन्नत क्वीन है तो रोज और लिली भी वही हैं। तभी मुझे मिस आध्या को देखकर फड़कन लगी।" फिर आध्या को याद करके मुस्कुरा देता है। "मुझे तुम्हारे बारे में जानकर अच्छा लगा फाइटर गर्ल।" यह सोच कर वो भी अपने काम में फिर से लग जाता है।अब हॉल में शिवाय, अन्य और आध्या के सिवा कोई नहीं है। तभी मन्नत ऊपर से नीचे आती है। उसके हाथों में अभी एक ऑफिस बैग था। उसको देखकर वह दोनों खड़े हो जाते हैं। मन्नत उन दोनों को इग्नोर करके बाहर चली जाती है। बाहर सभी गाड़ियां उसके लिए इंतजार कर रही थी। अन्य और आध्या भी उसके पीछे आ गए थे। अब मन्नत अपने आसपास देखती है। फिर वहां वीर को न देख कर एक गार्ड की तरफ देखकर कहती है, "मिस्टर वीर को बुलाओ।" तो वह गार्ड हां कहता है। और वीर को बुलाने चला जाता है। दो ही मिनट में वीर वहां आ जाता है। और मन्नत को गाड़ी के पास देखकर पूछता है, "मैम, आपने मुझे बुलाया?" तो मन्नत कहती है, "मेरे पर्सनल बॉडीगार्ड को मेरे साथ ऑफिस तो आनी चाहिए ना? क्या यह मुझे स्पेशली कहना पड़ेगा?" यह कहकर वह वीर की तरफ देखती है। तो वीर कुछ नहीं कहता। तो मन्नत आगे बढ़कर गाड़ी में बैठ जाती है। वीर भी आगे बढ़कर आगे वाली सीट पर बैठने को होता है। तो उसको किसी की घूरती हुई नजरें महसूस होती हैं। तो वह मन्नत की तरफ देखता है। जो गाड़ी के अंदर शीशा नीचे करके वीर की तरफ घूर रही थी। तो वह अपना तौ गटक कर दूसरी तरफ जाकर मन्नत के बगल में बैठ जाता है। वही यह सब कुछ आध्या हैरानी से देख रही थी। अन्य को तो कोई हैरानी नहीं हुई। क्योंकि उसको कल ही यह बात पता चली। अब अन्य आध्या के हाथ खींचते हुए दूसरे गाड़ी के पास जाती है। और उसके अंदर बैठ जाती है। आध्या अभी भी हैरानी में उसे गाड़ी में बैठ जाती है। गाड़ी में बैठकर आध्या से पूछती है, "यह क्या था?" तो अन्य कहती है, "क्या था? दो लव बर्ड्स एक साथ बैठकर जा रहे हैं। इसमें कौन सी बड़ी बात है।" तो आध्या और भी हैरान हो जाती है। तभी अन्य को रिलाइज होता है कि आध्या यह बात नहीं जानती। तो अन्य उसको सारी बात बता देती है। तब जाकर आध्या को सब समझ में आता है। पर वह अभी भी हैरान थी। क्योंकि यह चीज उसके लिए बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था। क्योंकि जहां तक वह जानती थी कि मन्नत को यह सब कुछ बकवास लगता है।



Write a comment ...